सब्र था तेरे जुबां से पलट जाने परपर ना काबिले बर्दास्त थारूह को रौंद करतेरा जमीर को जिंदा कहनाहां अफसोस है मुझे उसलहजे उस बदतमीजी परसच ये भी हैतेरी बेहूदगी के आगे सब कम था
सब्र था तेरे जुबां से पलट जाने परपर ना काबिले बर्दास्त था
रूह को रौंद करतेरा जमीर को जिंदा कहना
हां अफसोस है मुझे उसलहजे उस बदतमीजी पर
सच ये भी हैतेरी बेहूदगी के आगे सब कम था