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सब्र


सब्र था तेरे जुबां से पलट जाने परपर ना काबिले बर्दास्त था

रूह को रौंद करतेरा जमीर को जिंदा कहना

हां अफसोस है मुझे उसलहजे उस बदतमीजी पर

सच ये भी हैतेरी बेहूदगी के आगे सब कम था

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