झूठी तेरी बातो के सच से ना कोई नाते
पल मे तोड दे करार तू सारे
आप दिखा कर आप तोड दे
ख्वाब तू सारे
रोज तेरे किरदार नये
पुराने मिटने से पहले
बन जाए नये निशान तेरे
निकाल कर कमी दुनिया में
खुद से तू इन्साफ करे
कैसे समजाऊ तुझे
गुनाह तो किसीके ना माफ हुए
डर लगे कभी फिजुल ना हो जाए
मेरा जगह जगह माथे टेकना
तेरा मेरा होना तो सवाल दुसरा था
पहला तो था तेरा किरदार साफ़ करना
करने चली थी आबाद तुझे
मुझे क्या पता था खुद को ही खाक करना था


