रिवाजो की बेड़िया 

 लाखो ख्वाइशों को लाश बनाकर

 रूह को जकड़ जिस्म को आजाद कर 

 हंसी को बेजान कर

 खुशियों को पिंजरे में बन्द कर

 कठपुतली बना वजूद को नचाती है 

 इस तमाशे का मातम 

सिर्फ कुदरत के घर होता है