पेड़ नहीं सांसों की डोर काट रहे हो
सिर्फ खुद के नहीं आने वाले कल
में भी जहर घोल रहे हो
रूठ गया जो नभ तो पानी के लिए भी तरशोगे
मुंह फेर लिया जो धरा ने अन्न के लिए भी तरशोगे
मत करो खिलवाड़ इस प्रकृति से
सरंक्षण प्रकृति का नही आने वाले कल का
तुम कर रहे हो
प्रकृति की सुरक्षा को कर्तव्य बनाओ


