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पर्दाफास


जमाना पूछता है क्यू आँखों को रूहलबो को जिस्म लिखती हो तुमफरेबी हंसी का पर्दाफास करती है आँखेंइसलिए आँखों को रूह लबो को जिस्मलिखती है कलम

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