परंपराओ की गैरमौजूदगी 

संस्कृति पर चोट करती है

सभ्यता को जीवित रखने 

के लिए जरूरी ही

प्रथा की जड़ों को

समझना

जो संभव है बुजर्गों के साथ

समय बिता कर