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कभी तपिश गर्मी कीकभी शीत सर्द कीकभी बहार बसंत कीकभी बजंर पतंझड सीकुछ लड़किया चलती फिरतीकविताए होती हैउनका कागज पर सिमटना मुश्किल

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