क्यों तरिष्कृत हूं मै इस विस्तृत से संसार में

क्यों मृत्यु सैया मेरी तेरे गर्भ मे है तैयार हुई

मुमकिन है संसार तक पहुंचते पहुंचते दब गई

होगी पर कैसे तुंझसे मेरी चीखे नजरअंदाज हुई

निरन्तर मेरी आत्मा बिलखती रही पर तुझसे

 ना रहम की आवाज आई

मेरी टूटती हुई सांसों का एक ही सवाल था 

इस सशक्त संसार में क्यों मेरी ही मां लाचार हुई

जिस कुदरत ने था सौंपा तुझे 

जीवन देने का सम्मान आज वो भी शर्मसार हुई