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मेरी आत्मा


मेरी आत्मा का डेरा हैएक श्मशान मेंनित ना जानेकितने रिश्तों कीचिता जलती देखती हैनिरंतर उस आग मेंतप राख में सुकून दूंढती हैवैसे तो निडर है बेहदपर ना जाने क्यूं आजकलएक नाते की रूह कोभटकता देख कांप जाती है

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