मेरे देश में गजब नजारा है

हुजूम ठेको पर लगा है

शिक्षा के मंदिरों पर ताला जड़ा है

कुंभ पर पाप धुल रहे है

सड़को पर किसान खड़ा है

 देश का जवान शहीद हो रहा है

 चुनावी रैली से कोरोना भी डरा है

 किताबो में लोकतंत्र मौन पड़ा है

 सियासत का जमीर गहरी नींद में सो रहा है

 निरंतर मेरी कलम से अश्रु प्रवाह हो रहा है