चूल्हे की आंच में तपती हैं मां
सूरज की आग में जलता हैं पिता
यू ही नहीं मेरे सपनो का महल सजता
मां का सहजता देती है पंख उड़ान को
पिता की जटिलता देती है समझ
दिशा की पहचान को
फिर जा कर मेरी कोशिशों की
राह अंत हुआ
मंजिल की सुबह को नया आयाम मिला
✍️Himanshi sharma


