
मत हो तू मौन शब्दों का हथियार चलाना होगा
आखों से उतार पट्टी दुर्योधन को पहचाना होगा
कब तक खाकर दोखा खुद के अस्तीत्व को मिटाएगी
होश मे आ साहस कर ईज्जत को बना तू अपनी शक्ति
शर्मसार कर उस पुरुषार्थ का घमंड जो ईज्जत तेरी को क
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