मालूम था उस नदी को
बह गयी अगर वो
तो पत्थर का टूटना लाजमी
इसलिए चुना ठहरना उसने
एक तरफ पत्थर को
ना डूबने का मलाल रहा
कुछ मिलन कुदरत
की साजिश शिकार होते है
जिनका अधूरापन चांद
की तरह होता है
जिसकी खुबसूरती
अधूरे और पूरे
दोनो ही सूरत
में समान रहती है
