मै वो पेड़ हूं

जो उसने पतझड़ 

मे काट दिया

जो करता इंतजार

बहारों का 

नजारा कुछ और

ही होता

अब उसकी ज़ल्दबाज़ी

पर तरस करू

या अपनी किस्मत पर