तेरे वस्ल से ऐतराज नहीं मुझे
पर यूं गैरो में मेरी खुशबू ढूंढना
तौहीन है मेरे इश्क की
यू किसी के लबों के
करीब जा कर
सिरहाने मेरी बांजुओ
के याद करते हो
लानत हैं तेरे नए इश्क पर
अच्छा सुनो
सांसों के भी असूल होते हैं
यू हर किसी से नहीं उलझती
✍️Himanshi sharma


