देख कर उसको हवा

 भी पीछे करती थी

आसमान बिजली के बहाने

 आवाज देता था

बादल बरसने की जिद करते थे

 छूने की साजिश में

साये को भी तलब रहती थी

 साथ चलने की

रूह मंडराती थी आस पास उसके

वो वजूद 

कुदरत की साजिश थी

✍️Himanshi sharma