वो जिसके ताबीज से भी जलन होती है

वो गैरों के गले लगने के किस्से मुझे सुनता है

मेरे हाल को देख कर आसमान भी बरसता है

पतझड़ में सावन देख हर कोई हैरान होता है

उसको मेरी मुस्कराहट तो नजर आती है

पर छिपा सैलाब नजर नहीं आता है

खैर छोड़ो गलती उसकी नहीं है

खूबसूरत उसे भी मेरी मुस्कराहट लगती है

वैसे भी खुदगर्जी की सजा कहा मिलती है