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खंजर


वो जिसे तुमने खामोशी समझ नजरंदाज कियावो चीख थी मेरीकिस बात पर इतना इतरा रहे होजिसे कत्ल किया वो जिस्म था मेराखंजर रूह तक पहुंचता तो कोई बात थी

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