Poetry 1 min read 795.3K reads

कफन


उढा के आ रहे हो जो तुमजिस्म की चादर गैरो कोभूल गए थे क्या वो कफन था मेरापागल हो क्या तुमजो लाश से माफी मांग रहे होअब तो खुदगर्जी छोड़ करआत्मा की शांति मांग लो

Read more Earn more Learn more