कच्चे थे घर पक्के थे रिश्ते
कच्चे आंगन में थी हंसी की महफिल
सुकून की नींद थी उस मिट्टी की छत पर
आज सन्नाटा है पक्के आंगन में
पत्थर की छत पर कच्चा है मन
रिश्तों के तो बस नाम बचे
मतलब से सब नाते बने
✍️Himanshi sharma


कच्चे थे घर पक्के थे रिश्ते
कच्चे आंगन में थी हंसी की महफिल
सुकून की नींद थी उस मिट्टी की छत पर
आज सन्नाटा है पक्के आंगन में
पत्थर की छत पर कच्चा है मन
रिश्तों के तो बस नाम बचे
मतलब से सब नाते बने
✍️Himanshi sharma