
छोड के सारी दुनियादारी उलझ के रह गयी वो किसीकी जाली दुनिया मे
जो चलती थी लहरो सी डूब के रह गयी वो किसीकी बातो मे
भूल के खूल के जीना बन के रह गयी वो किसिका किस्सा
जिसकी आंखे ना जुकी थी कभी सजदे मे वो जुक्ने लगी किसी की
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