छोड के सारी दुनियादारी उलझ के रह गयी वो किसीकी जाली दुनिया मे
जो चलती थी लहरो सी डूब के रह गयी वो किसीकी बातो मे
भूल के खूल के जीना बन के रह गयी वो किसिका किस्सा
जिसकी आंखे ना जुकी थी कभी सजदे मे वो जुक्ने लगी किसी की अधुरी सी चाहत मे
पर्दा कुछ यू पडा उसकी नज़रों पर भुल के वो अपने सपने
मुक्मल किसी और के ख्वाब करने चल पढी
जब आंख खुली तो देखा उसने देखा चाहत तो बस आजमती
ये तो बस तडपाती है
✍@anshisharma__man


