वो जिसे तूने आंसू समझ नजरंदाज किया 

वो तेरे दिए जख्मों से टपकता लहू था


वो चीख जिसने तेरी रूह को परेशान किया

वो मेरी गलती नहीं तुमने ही जख्मों पर पैर रखा


 वो  जिसे रात के अंधेरे मे ढूंढ रहा

 वो चराग दिन के उजाले मे तूने फेंक दिया