तुम किस युग में

सती के प्रेम 

की कथा सुनाती हो

इस युग में तो

कितना भी निश्छल और निस्वार्थ

 हो प्रेम तुम्हारा

 देह के तराजू में तोल दी जाओगी___!!

तुम दोस्ती खोजोगी

वो प्रेमी का आलाप सुनाएंगे

तुम आत्मा त्याग कर आओगी

वो देह के नशे में नाचेंगे

पूर्ण समर्पित हो करके भी

तुम विकल्प ही रह जाओगी

इस युग में शिव सती 

सा प्रेम कहा से लाओगी....