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इल्हाम


बगैर इल्हाम मोहब्बतदिलकशी पर पड़ी चादर हैजिसे ओढ कर अक़ीदत तकपहुंचना तो मुमकिन हैपर इबादत तक मुश्किलबिना इबादत की मोहब्बतज़िंदगी का सफरतो तय कर सकती हैपर मौत के बादका सफर तयकर पाना नामुमकिन

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