हमदर्दी नहीं चाहिए 

दर्द का इलाज कर

मरहम को अपने

पास रख दो पल का

सुकून दे कर बदले

मे बेशक ज़िंदगी भर

गुलाम रख

हैरान क्यों है

भटकना मुझे मंजूर

नहीं अब तालाश

का अंजाम कर