मैं अपने ही राग अपने ही साज 

अपनी ही धुन बनाना चाहती हूं 

हाँ मैं अपने ही रशम अपने ही रिवाज बनाना चाहती हूं

जिन्दगी को अपना ही बुना लिबास पहनना चाहती हूं 

अपने ही उसुलो पर जिन्दगी की मंज़िल पाना चाहती हूं सीमाओ को हराना चाहती हूं 

सपनो का शहर बसाना चाहती हूं 

मुस्किल तो हैं पर मुमकिन बनाना चाहती हूं 

हाँ मैं सीमाओ को हराना चाहती हूँ