बेशर्मी कुछ ऐसी भी देखी हमने  

उस शख्स की

रात गैरो के साथ गुजार उसने

सुबह मेरे प्यार की हद पूछी मुझसे

मेरी खामोशी पर हंसते हंसते

मुझे मासूम बता शातिर दुनिया से 

बचने की हिदायत दी मुझे

ताजुब तो ये था उसे 

मेरे हालात पर तरश खाते 

तो देखा मैने

पर रात होते ही फिर घर से निकलते 

देखा उसे

✍️Himanshi sharma