सारी रात किताबों से लड़े
तड़के उठ तानो से लड़े
जब देखे मा बाप को दुनिया के सवालो का जवाब देता
तो रोज टूटे रोज जुड़े
सरकार दिखा कर पटवारी के सपने
जा कर चपरासी पर डटे
सरकार की तो जुबान हिल जाए
मेरे जैसे लाखो खुली आंखो से देखे सपने टूट जाए
जब बारी आए वोट मागंने की
बेरोजगारी का मुद्दा शिखर पर धरे
युवा बस संग्रष करे ओर हालात से लडें


