ठंड़ को होंस्लो का तप दे

गर्मी को‌‌ धैर्य से शीतल करे

दुर्गम राहों को दृढता से सुगम करे

मुस्करा कर कुदरत के हर रंग से युद्ध कर जाये


बेचैन रातो मे तिरंगे को आंचल बनाए

मुल्क की हिफाजत का धर्म अपनाए

कर्तव्य पर अडिग हो तन मन समर्पित कर जाएं

युद्ध की अग्नि में प्राणों की आहुति दे जाए


माटी को अपने रक्त से पवित्र कर जाए

देश को गर्वित कर शौर्य की गाथाएं दे जाए

तिरंगे को एक नया आयाम दे जाएं

 देश को गौरवशाली इतिहास दे जाए


 देह को धरती मा को भेंट कर जाए

 आत्मा को तिरंगे मे अमर कर जाए

 ऋणी अपना आने वाली हर नस्ल को कर जाए