पीछे से वार कर उसने हाथमे
चूड़ियों को खनकाया
पैंसठ और इकहत्तर में जिन्हें
छूपने की जगह ना मिली
उन्हे हार ने इतना कायर बनाया
पीछे से वार करके
कुत्तों को भ्रम हुआ
उनके वार से शेरो का अंत हुआ
गौर से देखो तिरंगे मे जिस्म
लहरता मिलेगा
माटी में रूह का अक्स दिखेगा
अस्तित्व मेरे वतन की हवा में
वीरों का सदा अमर रहेगा


