औरत परंपराओं से ओर मर्द परिवार से
बेडिया दोनों को ही जकड़ती है
औरत अबला तो मर्द को क्या नाम दिया जाए
एक को मर्यादा का आइना मिलता है
तो दूसरे को जिम्मेदारियों की सीख
रास्ता दोनों का ही ठोकरों भरा होता है
औरत नींव है तो मर्द छत
किसी एक को बेचारा कहना
अन्याय है मेरी नजर में

