वह दो पन्नो का कागज़
कहा गया वो
मेरा हृदय बैठा सा जा रहा है
मेरी लेखनी का सर्वश्रेष्ठ
प्रदर्शन था वह
सिर खम सा रहा है
बिखार दिए उसकी खोज मे
घर मे पड़ी वस्तुए, और
मन मे पड़े अनंत नवजात विचार
फिर एकाएक,
मन ठप हो जाता है
आखिर,वह भी तो मेरे मन का ही
कभी नवजात विषय था
उसे एक सभ्य व्यव्हार देना
लिखने के बाद की प्रशन्नता
उसे पहली बार हाथ मे
पकड़ना, वह अनुभव
आखिर कहा गया वह
आखे उसकी याद मे
जल निषार हो रही है
अब जाकर हस्बमामुल हुआ
माँ और शिशु का
स्वावलम्ब अनंत प्रेम
सबके लिये दो पन्नो का
कागज़ था वह
पर मेरे लिये,
वह प्रेम था
प्रेम उद्दीपन कर्ता था
वह दो पन्नो का कागज़....


