मै शब्दप्रहरी,
चल चलकर-ता विसर्जित
व्यर्थ मन अभिमान को
मै समर्पित
परमात्मा के मिलन घटक
अभियान को
हर पल,
हर पहर के,प्रहर की
उत्तेजना के निरामल
अधिकार को
मै समर्पित
मेर विवेक जागृत हो रहा है
अभी,धुंधल अंधियार को
लेकर मशाले कागज़ी
माया रहित हो स्याही संभव
मै समर्पित।।


