किसी के महकावे पर मोहित ना होना

इत्र सुगंधित होता है, सुन्दर नही

उसके सुगंध के बढते दायरे का

हवाला मत दो

तुम्हारी इज़ाजत के बगैर

डिबीए की हिलोर भर है

सुख और सांपत्य का बहकाव है

इसलिये तो,

'इत्र समाजिक है'