अवसाद
ब्रह्माण्ड में प्रयुक्त हर भौतिक,मानसिक या व्यावहारिक श्रोत का हनन अवसाद है,यह अनुभव जीव के होने या ना होने पर रेखा चित्रित नहीं होता,
वास्तविक बुद्धिजीवी अवसाद के जन्म से प्रायः प्रशन्न होते है क्योंकि उनको अस्तित्व के महत्वता को निखारने का अद्भुत
अवसर जो मिल जाता है।
अवसाद दुख का प्रतीक है ऐसा कहना सदा के लिए अवमान्य है यह तो परम प्राप्ति का उद्दीपन कर्ता है ,जीव और उसके कर्मो के महत्वता का परम व्याख्यान है ,जीव की इच्छाशक्ति पर उसके कर्मो को देखते हुए किया गया अवसाद उसके आवश्यकता और अनावश्यकता का चुनाव मार्ग तय करता हैं जीव को तो सिर्फ उस अवसाद को आत्मसाध करने की देर है
मानव से अतिमानव बनने का सफर तय करवाती है, हर परमत्याग का प्राप्ति मार्ग अवसाद का आत्मसाधन है , इस परम त्याग का कारण है उस परम महत्वता का ज्ञान , इस ज्ञान या अनुभव का कराद है वह परम परीक्षा , परीक्षा को देते वक्त शक्ति के श्रोत या स्वरूप का नाम ही तो अवसाद है और यह सतत् प्रक्रिया है तो आत्म साधन है।


