परिंदा "मैं" का


अब कैद में फड़फड़ाने लगा है परिंदा "मैं" का, मुझे रिहा कर दो कहने लगा है परिंदा "मैं" का, 

सूरत वही रखी, सीरत कितनी बदली, बेमिसाल कारीगर है परिंदा "मैं" का|

ऐसे हो ना, वैसे हो ना,...... "मैं" को मैं रहने दो ना , अब चीखने लगा है परिंदा "मैं" का, 

और अब किसी से शिकवा जायज नहीं मेरा, मुझ में ही शिकायत करने लगा है परिंदा "मैं" का|

                            


 "अनूप"