यूँही कुछ ख्वाब हाथों से फिसल गए
यूँही कुछ लफ़्ज़ कागज़ पर बिखर गए
यूँही आँखे नाराज़ हो गईं
यूँही दिल से कुछ बात हो गई
बस यूँही.....
यूँही लकीरों को आस मिल गई
यूँही दर्द को आवाज़ मिल गई
यूँही चीज़ एक खास मिल गई
यूँही धूप में बरसात हो गई
बस यूँही.....
यूँही आधी रात हो गई
यूँही चाँद से बात हो गई
यूँही ख्वाहिशें आज़ाद हो गईं
यूँही भूल एक-आध हो गई
बस यूँही.....
फिर भी ऐ ज़िन्दगी तेरा दामन थामे हुए हैं
फिर भी तुझे आज़माने की ज़िद किए हैं
बस यूँही....हाँ यूँही
।।अन्नू।।


