धुंधली सी पड़ने लगी है तस्वीर यार की,
आवाजें अब आती नहीं दूर दराज़ की,
बार्ज़े से चाँद तो आज भी दिखता है मगर,
चाँद में अब दिखती नहीं परछाई प्यार की...


धुंधली सी पड़ने लगी है तस्वीर यार की,
आवाजें अब आती नहीं दूर दराज़ की,
बार्ज़े से चाँद तो आज भी दिखता है मगर,
चाँद में अब दिखती नहीं परछाई प्यार की...