परिणय के पंद्रह वर्ष उपरांत एक दिन
मैने पतिदेव से बोला आफिस से आते हुए एक गुलाब ही ले आते
कभी दूर से देख कर यूँ ही मुसकुराते
बोले भगवान का शुक्र मनाओ की अबतक सही हूँ
प्रिये ज़रा गौर से देखो मैं शाहरुख नहीं हूँ
मैं खीज के बोली वो तो तुम सात जन्म में ना हो पाओगे
वो टेढ़े हो कर हाथ फैलाने की अदा कहाँ से लाओगे
भूरी-भूरी आँखों की गहराई कहाँ से पाओगे
बोले सोचूं तो शाहरुख में ऐसी भी कोई बात नहीं
चौड़ी नाक, मोटे होठ कद-काठी भी कोई खास नहीं,
मैने कहा छोड़ो अब इस बहस में क्या जाना
तुम्हारे बस में नहीं शाहरुख बन पाना,
तुम ऐसा करो वापसी में एक किलो आलू ही ले आना...
।।अन्नू।।


