मैं चाँद हूँ!!


मैं चाँद हूँ, मुझे तन्हा रहने की आदत है,

किसी को मैं पत्थर दिखता हूँ किसी को खुदा,

मुझे हर नज़र मंज़ूर है, मैं चाँद हूँ

कोई ख़ामोशियों में अपने दिल का हाल सुनाता है,

कोई मुझे ताकते ताकते खुद में खो जाता है

कोई मुझमे उम्मीद ढूँढता है तो कोई जवाब

मैं लाचार सा एक टक उन्हें देखता रहता हूँ,

मुझे मेरा करम मंज़ूर है, मैं चाँद हूँ