एक उम्र की खामोशी रही,

ताउम्र बात करते रहे,

आवाज न देकर भी,

सब कहते रहे बिन कहे,

तुम्हारे पास,

जब भी मैं होता हूं,

मुझे लगता है कि,

मैं होता हूं तुम्हारे पास,

न किसी शब्द से परे,

न किसी शब्द की खोज में,

नि:शब्द शिशु की भांति,

उंगली चबाते हुए तुम्हे देखता हुआ,

©अजय पोद्दार ‘अनमोल'

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