निःसंदेह ले जाना प्रेम से 7 बीघा जमीन कभी,

जिस पर खड़ा हूं वो तीन गज नहीं छीन पाओगे प्रयास कर लेना,

नए भारत का रोना लेकर न बैठिये दिन रात,

पुराना लूटकर ही कई कंगाल आबाद हुए है,

भीख में मिले ये किसी की जागीर थोड़ी है,

मांगकर ले जाओ पेट भर कोई न दे मेरे देश में इतना कोई गरीब थोड़ी है,

©अजय पोद्दार ‘अनमोल'

•जपराग•