किसी बूँद की प्यास हूँ,

अधिक नहीं तनिक सा एहसास हूँ,

यूँही नहीं देखता नभ की ओर,

प्रेम से बिखरा अतृप्त श्वास हूँ,

आलिंगन में पीड़ा हूँ,

वेदना में श्रृंगार हूँ,


जहां तक श्रोता सुनना चाहे,

जहां तक लेखक लिखना चाहे,

जहां तक गायक गाना चाहे,

जहां तक तुम समझना चाहो,

बस वहीं तक जान पाओगे,

मैं अमर्त्य का वरदान प्राप्त,

एक कल्पना हूँ एक राग हूँ,


न मृत्यु का भय है,

न मन में प्रलय है,

न हार की अभिलाषा,

न जीत की परिभाषा,

मैं आदि नहीं हूँ अंत भी नहीं हूँ,

जिसे गिन न सको वो अनगिनत भी नहीं हूँ,

कोई स्वाभिमान नहीं मुझमें,

न आत्मविश्वास हीन हूँ,


एक कवि की कल्पना हूँ,

एक किसान की फसल हूँ,

एक परिणाम हूँ अभ्यार का,

एक नाभिक की नाव हूँ,

एक गरीब का गांव हूँ,

मैं रस नहीं हूँ जो परिवर्तन की आशा लिए,

मैं तो अलंकार हूँ,

पथिक हूँ पथ उन्मुलन का,

सृजन कहो मुझे जीवन का,


किसी नदी का अंतिम छोर हूँ,

किसी सदी का स्वर्णिम मोड़ हूँ,

किसी व्याकुल दरिद्र का शोर हूँ,

किसी बंजर धरती पर मेघ घनघोर हूँ,

सत्य का परिचायक मिथ्या का तोड़,

जिधर हुआ परिश्रम निःसंदेह मैं उस ओर हूँ,

दिकसूचक कालचक्रतंत्र का रक्तिम बागड़ोर हूँ,

अन्याय विरोधी न्याय का जोर हूँ,

कर्म का अवलोकन धर्म की खोज हूँ,

भ्रष्ट के लिए विष हूँ भूखे के लिए भोज हूँ,



कोई गाता है तो गीत हुँ,

कोई पढ़ता है तो प्रीत हूँ,

कोई ऋतु हूँ तो शीत हूँ,

कोई प्रकृति का अंश मात्र बीज हूँ,

सदियों से चली आरही रीत हूँ,

एकांत से नहीं हुआ भयभीत हूँ,

किसी मात की पूँजी हूँ,

किसी पिता का शान हूँ,

गुरु का ही मैं ज्ञान हूँ,

कथानक हूँ किसी कथा का,

औषधि हूँ हर व्यथा का,


©अजय पोद्दार 'अनमोल'