नर झूल रहा था बाजार में,
नारी का देह बिका बाजार में,
बच्चा सड़ा बाजार में,
बूढ़ा बेसुध पड़ा बाजार में,
गोदाम था भरा बाजार में,
चोर जम चुका था बाजार में,
छुपाकर सारा अनाज बाजार में,
लुट गया समाज बाजार में,
सभ्य समाज का बेहया सच,
मुर्दों का काला पक्ष,
सब मेला लगाया बाजार में,
बंगाल की धमनियों से बहता खून,
कालाबाजरी का नंगा जुनून,
घूम रहा था बाजार में,
नाचते हैजा मलेरिया चेचक घोंघा,
मिल रहा था एक साथ बाजार में,

