तुम्हारी ज़ुबान के छुनेसे देखा है मैने, अल्फाजाें काे बहकते हुए 

दाे लफ्जाें के बीच की खामाेशी काे, सुना है मैने कूछ कहते हुए 


कितने मुरझाए हुए दीलाें काे, देखा है तुम्हें सुनकर मुस्कुराते हुए 

तुम्हे ग़ज़ल पढ़ते वक्त हमेशा देखा है, ग़ज़ल काे शरमाते हुए 


जब भी दील तडप उठता है, मै अल्फाज मेरे बुन ताे लेता हूं 

नज्म किसीकी भी हाे बस आवाज मै तुम्हारी सुन लेता हूं   Ap #AnkajiP