ढ़ूँढ़ता हूँ मैं इलाज मर्ज़-ए-ला-इलाज का।एक शख़्स भी नहीं मिला मेरे मिज़ाज का।दिल है बदतमीज़ इसकी आदतें ख़राब हैं।इसलिए नहीं है कोई दोस्त बद-मिज़ाज का।
ढ़ूँढ़ता हूँ मैं इलाज मर्ज़-ए-ला-इलाज का।एक शख़्स भी नहीं मिला मेरे मिज़ाज का।
दिल है बदतमीज़ इसकी आदतें ख़राब हैं।इसलिए नहीं है कोई दोस्त बद-मिज़ाज का।