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Matla aur sher


ढ़ूँढ़ता हूँ मैं इलाज मर्ज़-ए-ला-इलाज का।एक शख़्स भी नहीं मिला मेरे मिज़ाज का।

दिल है बदतमीज़ इसकी आदतें ख़राब हैं।इसलिए नहीं है कोई दोस्त बद-मिज़ाज का।

— अंश।
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