गमज़दा-गमगीन  है  मंज़र, सुनो।

काटने को  दौड़ता  है  घर, सुनो।


रात भर जगते  जहाँ मैं और तुम।

रात भर सोता नहीं  बिस्तर, सुनो।


किस ख़ता की थी सज़ा जाना तेरा।

सोचता  हूँ मैं यही अक्सर, सुनो।


इश्क़ से पहले भला था दिल मिरा।

इश्क़ में दिल बन गया पत्थर, सुनो।


कट रही थी ख़्वाब जैसी  ज़िन्दगी।

ज़िन्दगी  है  मौत से बद्तर, सुनो।