
-वो दिन थे बैलगाड़ी के.
बाबा की पीठ के सवारी के
गाँव के मिट्टी के
हौसलों की चट्टान के
खेत के खलियान के
रात में शास्त्रार्थ के
-वो दिन थे बैलगाड़ी के.
तुलसी की आशा के
अंकुर के निराशा के
एक बड़ी सी अभिलाषा के
राम के रहीम के
अल्लाह के करीम के
-वो दिन थे बै
Read More! Earn More! Learn More!
