फेसबुक पर पोस्ट कर कर के... करना क्या है,
अगर यही जीना है दोस्तो... तो मरना क्या है ?
फ्रेंड्स की गिनती का हिसाब... हर रोज करते है
मगर 'माँ' को हर रोज फोन करने से डरते है,
ब्लॉक होन की चिंता तो हर पल सताती है
पर पुराने दोस्तो की कॉल हमेशा मिस हो जाती है
कंमेंट्स/ लाइक्स बार बार चेक करने की आदत सी हो गई है
बचपन में रोज होने वाली मस्ती जाने कहाँ खो गई है
रोज नए नए ट्रेंड्स चलाते है,
आफिस चाहे लेट हो जाते है
वाल पर लिखते है हर रोज कुछ नया,
मगर बहन की पुरानी ख्वाहिशें अब तक बाँकी है.
फालतू सी हर पोस्ट को तो शेयर कर देते है,
मगर पड़ोसी को देख कर दूर से ही हँस देते है
डेली पोस्ट्स की रफ़्तार हर रोज बढ़ जाती है
जिंदगी रुक सी गई है, ये चिंता कभी नहीं सताती है
फेसबुक पर पोस्ट कर कर के... करना क्या है,
अगर यही जीना है दोस्तो... तो मरना क्या है ?