
कुछ वक्त पहले ही मै शून्य को खोजने निकला था
मुझे नहीं पता था कहाँ मिलेगा
कब मिलेगा
कैसे मिलेगा
मगर एक ख्वाब देखा था
मिलेगा जरूर
आज नहीं तो कल मिलेगा
मगर मिलेगा जरूर
यही भरोषा था
कई बार मेरा भरोषा टूटा भी,
कई बार मै लड़खड़ाया भी,
खुद को खोशो दूर पाया
इस छोटे से शून्य से
कई लोगो ने मुझे हाथ दिया
जब भी गिरा उठाया
जब भी सोया जगाया
और वक्त पड़ने बताया
छोटा -
इतना छोटा भी नहीं है शून्य
इतना पास भी नहीं
न जाने कितने और शून्य मिलेंगे
शून्य के इस रस्ते में
मगर मै -
मै तो निकल पड़ा हूँ शून्य की खोज में
न जाने कितना चला हूँ अभी तक
न जाने कितना और चलना है
मुझे नहीं पता
मुझे बस इतना पता है
अगर मै आज जी
Read More! Earn More! Learn More!
